Answer: अत्यधिक भोग और अत्यधिक तपस्या से बचने के लिए
Explanation: गौतम बुद्ध ने अनुभव से सीखा कि न तो अत्यधिक भोग और न ही अत्यधिक तपस्या आत्मज्ञान की ओर ले जाती है। राजमहल में विलासितापूर्ण जीवन बिताने और फिर कठोर तपस्या करने के बाद उन्होंने पाया कि दोनों ही मार्ग चरम हैं और मानसिक-शारीरिक संतुलन को बिगाड़ते हैं। इसीलिए उन्होंने 'मध्यम मार्ग' की शिक्षा दी, जो संतुलित जीवन पर आधारित है। मध्यम मार्ग का पालन करने से व्यक्ति न तो इंद्रिय भोग में फँसता है और न ही अपने शरीर को अनावश्यक कष्ट देता है। यह मार्ग अष्टांगिक मार्ग के रूप में स्पष्ट किया गया, जो आत्मिक शांति और निर्वाण की ओर ले जाता है।
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