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इस पोस्ट में हमने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास स्थापना से लेकर स्वतंत्रता तक, महत्वपूर्ण अधिवेशनों, नेताओं और आंदोलनों के साथ समझाया है। कंटेंट इस तरह तैयार किया गया है कि छात्र कम समय में पूरे विषय का revision कर सकें और concepts को आसानी से याद रख सकें।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास (Indian National Congress History in Hindi)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली संगठन रही है।
1885 में स्थापित यह संस्था धीरे-धीरे भारत के स्वतंत्रता संग्राम की मुख्य धुरी बन गई।
आज भी प्रतियोगी परीक्षाओं में कांग्रेस के इतिहास से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।
इस लेख में हम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास विस्तार से, सरल भाषा में और परीक्षा-उपयोगी तथ्यों के साथ समझेंगे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में की गई थी।
इसकी स्थापना का उद्देश्य भारतीयों को एक राजनीतिक मंच प्रदान करना था, जहाँ वे अपनी समस्याएँ ब्रिटिश सरकार के सामने रख सकें।
- स्थापना वर्ष: 1885
- स्थापना स्थान: बॉम्बे
- संस्थापक: ए. ओ. ह्यूम
- प्रथम अधिवेशन स्थल: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज
- प्रथम अध्यक्ष: व्योमेश चंद्र बनर्जी
प्रारंभ में कांग्रेस एक मध्यमवर्गीय और शिक्षित वर्ग का संगठन था, लेकिन समय के साथ यह जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया।
उदारवादी चरण (1885–1905)
कांग्रेस का प्रारंभिक चरण उदारवादी चरण कहलाता है।
इस दौर के नेता ब्रिटिश शासन से टकराव के बजाय सुधारों की माँग करते थे।
प्रमुख उदारवादी नेता
- दादाभाई नौरोजी
- गोपाल कृष्ण गोखले
- सुरेन्द्रनाथ बनर्जी
- फिरोजशाह मेहता
इन नेताओं का विश्वास था कि संवैधानिक तरीकों, याचिकाओं और प्रस्तावों के माध्यम से अंग्रेजी सरकार से सुधार प्राप्त किए जा सकते हैं।
उग्रवादी चरण और कांग्रेस विभाजन (1905–1917)
1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन ने भारतीय राजनीति में उग्र राष्ट्रवाद को जन्म दिया।
कांग्रेस के भीतर उग्रवादी नेताओं का प्रभाव बढ़ा।
उग्रवादी नेताओं में शामिल थे
- बाल गंगाधर तिलक
- लाला लाजपत राय
- बिपिन चंद्र पाल
1907 में सूरत अधिवेशन में कांग्रेस दो भागों में बँट गई –
उदारवादी और उग्रवादी।
हालाँकि यह विभाजन अस्थायी था।
होम रूल आंदोलन और कांग्रेस की एकता (1916)
1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता हुआ।
इसी समय होम रूल आंदोलन प्रारंभ हुआ।
- होम रूल आंदोलन के प्रमुख नेता: बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट
- मुख्य माँग: भारत को स्वशासन
इस आंदोलन से कांग्रेस को फिर से मजबूती मिली और राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा मिली।
गांधी युग और कांग्रेस का जन आंदोलन में परिवर्तन (1917–1939)
1915 में महात्मा गांधी के भारत आगमन के बाद कांग्रेस का स्वरूप पूरी तरह बदल गया।
गांधी जी ने कांग्रेस को आम जनता से जोड़ा।
गांधी युग के प्रमुख आंदोलन
- चंपारण सत्याग्रह (1917)
- खेड़ा सत्याग्रह (1918)
- असहयोग आंदोलन (1920–22)
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)
इस काल में कांग्रेस किसान, मजदूर, महिलाएँ और युवाओं का संगठन बन गई।
कांग्रेस और भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार की नीतियों के विरोध में कांग्रेस ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया।
इस आंदोलन के दौरान कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार कर लिए गए,
फिर भी यह आंदोलन स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक सिद्ध हुआ।
स्वतंत्रता, विभाजन और कांग्रेस की भूमिका (1947)
1947 में ब्रिटिश सरकार ने भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लिया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाई।
- 15 अगस्त 1947: भारत स्वतंत्र हुआ
- जवाहरलाल नेहरू: स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री
हालाँकि इसी के साथ भारत का विभाजन भी हुआ, जो कांग्रेस के लिए एक कठिन और ऐतिहासिक चुनौती थी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास: महत्वपूर्ण घटनाएँ (Table)
| वर्ष | घटना / अधिवेशन | विवरण (Exam Oriented) |
|---|---|---|
| 1885 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना | ए. ओ. ह्यूम द्वारा बॉम्बे में स्थापना। प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी। |
| 1885–1905 | उदारवादी चरण | संवैधानिक सुधार, याचिका और शांतिपूर्ण आंदोलन। दादाभाई नौरोजी, गोखले प्रमुख नेता। |
| 1905 | बंगाल विभाजन विरोध | लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन। स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन की शुरुआत। |
| 1907 | सूरत अधिवेशन | कांग्रेस का उदारवादी और उग्रवादी गुटों में विभाजन। |
| 1916 | लखनऊ अधिवेशन | कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौता। कांग्रेस की पुनः एकता। |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह | गांधी जी का भारत में पहला सत्याग्रह। कांग्रेस जन आंदोलन की ओर बढ़ी। |
| 1920–22 | असहयोग आंदोलन | ब्रिटिश संस्थाओं का बहिष्कार। चौरी-चौरा कांड के बाद स्थगित। |
| 1930 | सविनय अवज्ञा आंदोलन | दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह। ब्रिटिश कानूनों की अवहेलना। |
| 1935 | भारत शासन अधिनियम | प्रांतीय स्वायत्तता। कांग्रेस ने प्रांतीय सरकारें बनाई। |
| 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन | कांग्रेस का अंतिम जन आंदोलन। सभी बड़े नेता गिरफ्तार। |
| 1946 | कैबिनेट मिशन योजना | संविधान निर्माण और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू। |
| 1947 | भारत की स्वतंत्रता | 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र। जवाहरलाल नेहरू पहले प्रधानमंत्री बने। |
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